कर्ज वसूली या गुंडागर्दी? रिकवरी एजेंट की गाली-धमकी के स्क्रीनशॉट वायरल

महेंद्र सिंह
महेंद्र सिंह

कभी-कभी एक मोबाइल स्क्रीन पूरे सिस्टम की पोल खोल देती है। एक तरफ बैंकिंग सिस्टम और नियामक संस्थाएं सभ्य वसूली की बात करती हैं। दूसरी तरफ रिकवरी एजेंट के मैसेज में शब्द ऐसे गिरते हैं जैसे सड़क के झगड़े में फेंके गए पत्थर।

स्क्रीनशॉट में एक रिकवरी एजेंट कर्जदार को धमकी देता दिख रहा है। मैसेज की भाषा सिर्फ सख्त नहीं है…बल्कि खुली गाली-गलौज और डराने की कोशिश भी दिखाई देती है।

यह वही तरीका है जिस पर Reserve Bank of India ने साफ प्रतिबंध लगा रखा है।

स्क्रीनशॉट में क्या दिख रहा है

सामने आए स्क्रीनशॉट में एक नंबर से पहले कर्ज चुकाने का मैसेज भेजा गया है। उसमें लिखा है कि अगर जल्दी भुगतान नहीं किया गया तो कानूनी कार्रवाई होगी, परिवार वालों को कॉल किया जाएगा। इसके कुछ देर बाद आने वाले मैसेज में भाषा पूरी तरह बदल जाती है।

शब्दों में गुस्सा, धमकी और अपमानजनक टिप्पणी दिखाई देती है। यानी वित्तीय वसूली की बातचीत अचानक सड़कछाप धमकी में बदलती नजर आती है।

RBI के नियम क्या कहते हैं

बैंकिंग नियामक Reserve Bank of India ने रिकवरी एजेंटों के लिए स्पष्ट गाइडलाइन बनाई हैं।

इन नियमों के मुताबिक रिकवरी एजेंट गाली-गलौज या धमकी नहीं दे सकते। रिश्तेदारों या दोस्तों को कॉल करना प्रतिबंधित है। कॉल या विजिट सिर्फ सुबह 8 से शाम 7 बजे के बीच ही हो सकती है। एजेंट को पहचान पत्र और बैंक का ऑथराइजेशन दिखाना जरूरी है।

इसके अलावा एजेंट को ग्राहक की प्राइवेसी का सम्मान करना अनिवार्य है।

ट्रेनिंग और सर्टिफिकेट भी जरूरी

आरबीआई के अनुसार कोई भी व्यक्ति बिना प्रशिक्षण के रिकवरी एजेंट नहीं बन सकता। उसे Indian Institute of Banking and Finance से डेब्ट रिकवरी एजेंट का प्रशिक्षण प्रमाणपत्र लेना जरूरी है।

इसका मकसद यही है कि वसूली का काम कानूनी और सभ्य तरीके से हो। लेकिन स्क्रीनशॉट में दिख रही भाषा इन नियमों से बिल्कुल उलट दिखाई देती है।

अगर रिकवरी एजेंट परेशान करे तो क्या करें

ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। कानून ग्राहकों को कई अधिकार देता है। सबसे पहले कॉल या मैसेज का स्क्रीनशॉट और रिकॉर्डिंग रखें। बैंक के Grievance Cell में लिखित शिकायत करें। अगर कार्रवाई न हो तो Banking Ombudsman में शिकायत दर्ज करें। इन सबूतों के आधार पर बैंक और एजेंट दोनों पर कार्रवाई हो सकती है।

वसूली का सिस्टम या डराने का कारोबार?

भारत में डिजिटल लोन और ऐप-आधारित कर्ज तेजी से बढ़े हैं। लेकिन इनके साथ रिकवरी एजेंटों की शिकायतें भी बढ़ी हैं। कई मामलों में एजेंट सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी देते हैं। रिश्तेदारों को फोन करते हैं। अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं। यह सब सीधे-सीधे बैंकिंग नियमों का उल्लंघन है।

कानून किताब में है, व्यवहार फोन में

नियमों की किताब में सब साफ लिखा है। सम्मानजनक भाषा। समय सीमा। प्राइवेसी का सम्मान। लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब एक रिकवरी एजेंट फोन उठाता है। अगर बैंकिंग सिस्टम सच में भरोसा बनाना चाहता है, तो उसे सिर्फ कर्ज नहीं…व्यवहार भी वसूलना होगा।

क्योंकि आर्थिक दबाव में फंसे लोगों के साथ अपमान की भाषा न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि एक सभ्य समाज के लिए भी अस्वीकार्य है।

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